रविवार, 31 मार्च 2024

हिंदू नव वर्ष

लेखिका: अनामिका संजयअग्रवाल *मुस्कान *

भारतीय संस्कृति का पवित्र पर्व,वर्ष का प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को माना जाता है।कहा जाता है कि भगवान ब्रम्हा ने इसी दिन सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी।इसी दिन भगवान विष्णु ने दशावतार में से पहला मत्स्य अवतार लेकर प्रलय काल में अथाह जल राशी में से मनु की नौका को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया था। प्रलयकाल समाप्त होने पर मनु से ही नई सृष्टि की शुरूआत हुई।

      नव वर्ष में नये सिरे से प्रकृति के नये जीवन की शुरूआत होती है।बसंत की बहार आती है।लगभग इन्ही दिनों 21 मार्च को पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर पूरा करती है। उस वक्त दिन रात बराबर है।इसी दिन से धरती में प्राकृतिक नव वर्ष प्रारंभ होता है 

     बसंत के मनमोहक सौंदर्य की आभार यह प्रकृति रानी हरीतिमा की चुनरी ओढ़े नई दुल्हन की भांती संवर जाती है। खेतों में खिली है सरसों के पीले पीले फूल और गेहूं की बालियां मंद मंद लहराते हुए झूमती है निर्जर सघन घने जंगलों में खिले पलाश और सेमल के फूलों का अनुपम सौंदर्य मिलकर प्रकृति की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं आम्र के वृक्षों में आम्र मंजरियों से लदे वृक्षों में नई-नई सुंदर कोपलें आती हैं । कोयल की मधुर ध्वनी भौरों को आकर्षित करने लगती है चारों और प्रकृति का ही उत्सव चल रहा होता है वातारण आनंदित होकर आनन्द की अमृत वर्षा करने लगती हैं। रंगीन रंगोत्सव साथ नव संवत्सर का आगमन होता है।

प्राचीन काल में ऋतु और राशि परिवर्तन के ऐसे समय स्वयं को स्वस्थ और निरोगी रखने के लिए  सात्विक आहार व्रत उपवास से मन और शरीर दोनों को शुद्ध और सशक्त उपक्रम है। शीत और ग्रीष्म ऋतु का समागम होता है तब शरीर में वात पित्त और कफ का समायोजन घट बढ़ जाता है।तो रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है इसलिये इस समयकाल में नीम की कोमल पत्तियों को खाने से स्वास्थ्य लाभ होता है। इस समय अचानक गर्मी बढ़ जाने से बुखार मलेरिया और चेचक फैलता है अपच और उल्टी से बचने के लिये हल्काभोजन करना चाहिये ।इस समय कीट पतंगा मच्छरों का आतंक बढ़ जाता है जीससे बिमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है।वाइरस फैलते है इन सब से बचने के लिये नीम और कपूर जलाकर सकारात्मक उर्जा फैलाकर पर्यावरण को शुद्ध करते है।

पशु पक्षी और जीवजंतु में नव जीवन के संचार से नवांकुर प्रस्फुटित होने लगते हैं।

सरसो और गेहूं की लहलहाती फसलों को देखकर किसान खुशी से झुमते नाचते गाते है।

     इस समय सभी कुछ नया होता है। बच्चों की पढ़ाई का एक सत्र खत्म होता है। नये जोश के साथ नयी किताबें नयी अध्ययन सामग्री के साथ नयी कक्षायें प्रारंभ होती हैं। इसी समय 1अप्रेल से नये सत्र के वित्तीय काम प्रारंभ होते हैं। 

   वर्तमान में विश्वविख्यात स्वयंसेवी सामाजिक  संगठन राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक केशवराम बलिराम हेडगेवार जी की जयंती भी इसी दिन मनाई जाती है

    भारत वर्ष के गौरव को पुनः विश्व पटल पर लाने के लिये पश्चिम अंधानुकरण के भ्रमजाल से निकलकर अपनी हिन्दू सभ्यता के नव वर्ष को मनाने की परंपरा को अपनाना चाहिये और नयी पीढी को भी यही करने के लिये प्रोत्साहित करना चाहिये। 

धन्यवाद।

अनामिका संजयअग्रवाल *मुस्कान *

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