लेखिका: रेखा चौहान 'राज'
एक रात की बात है ठंड बहुत ज्यादा थी एक बुजुर्ग महिला जिसका नाम बुगली था गांव के एक घर के सामने आकर चारपाई बिछाकर आराम कर रही थी उस घर की महिला की नजर उस पर पड़ी वहीं पर उस महिला सुखबीरी देवी का घर था तो उसने देखा कि वह बुजुर्ग महिला चारपाई पर लेटी थी।
😲ठंड बहुत ज्यादा थी महिला घर से बाहर आई उसने देखा कि इस कंपकंपाती ठंड में महिला सिकुड़ते हुए सोने की कोशिश कर रही है फिर उसने उस बुजुर्ग महिला से पूछा कि आप यहां क्यों लेटी हैं बुजुर्ग महिला ने भावुक होते हुए अपनी कहानी बताईं और कहा कि उसके पास बच्चे नहीं है और परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से मकान बिक चुका है कोई कमाने वाला भी नहीं है।
इसलिए मैं यहां बुग्गी ( भैंसा बुग्गी) ने नीचे लेट कर ठंड से बचने की कोशिश कर रही हूं महिला को उस बुजुर्ग महिला की बातों पर बड़ा ही आश्चर्य हुआ और उसने बड़े नर्म स्वभाव के साथ अपने घर के अंदर आने के लिए कहा। फिर धीरे-धीरे करके वह बुजुर्ग महिला परिवार के सभी सदस्य के साथ घुल मिल गई और घर के बच्चों के प्रति उसका स्नेह और बच्चों का प्यार उसके प्रति बेहद मार्मिक रहा बच्चों में वह बुजुर्ग महिला अपनी सारी परेशानियां भूल गई कई सालों तक वह महिला उसी परिवार के साथ रही।
बच्चों को नित नई कहानियां सुनाती जीवन के प्रति संघर्ष और हौसलों के साथ आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती, घर की लड़कियों को संस्कार और सभ्यता के बातें बताती, जीवन में आगे बढ़ाने के विवाह से पहले और विवाह के बाद कैसे दोनों परिवारों को जोड़ कर रखना है ऐसी बहुत सी बातें वह घर के बच्चों के साथ अन्य लोगों को भी अपने जीवन के अनुभव सुना कर जीवन के प्रति प्रेरित करती।
सच कहूं तो उन लड़कियों में से एक लड़की मैं भी थी मैं अपनी सारे कजिन भाई बहनों के साथ स्कूल कॉलेज से बाद में उस महिला के साथ खाने से लेकर हर चीज पर बातचीत करते। कभी-कभी जब उस महिला की आज भी याद आती है तो लगता है कि काश इस समय भी कोई ऐसी महिला मेरे घर में होती और मेरे बच्चों को आने वाले जीवन के प्रति कहानियां सुनाती।
तो शायद एक बार फिर संस्कृति जी उठतीं।
दे किसी का साथ पुण्य कमाएं
अपने लिए न सही बच्चों के लिए थोड़ा नेक कर्म कर जाएं
अंतिम समय में भी वह महिला उसी परिवार के साथ थी जब उसका देहांत हुआ तो उसके परिवार के कुछ लोगों को बुलाकर उसका अंतिम संस्कार किया गया । इस तरह बुजुर्ग महिला का दर्द समझते हुए पूरे परिवार ने उसका साथ दिया।
उस परिवार के बच्चे तो आज भी उस बुजुर्ग महिला की बातों को याद रखते हुए उसके द्वारा दिया ज्ञान जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा मान कर चलते हैं बुजुर्ग अपने हो या पराए हमेशा ज्ञान ही मिलता है।☺️
संस्कृति को संजोए रखना
बुजुर्गो को घर में बनाएं रखना।
पुराना पेड़ फल न सही छांव ठंडी देता है
इस सभ्यता आर्यावर्त की बनाएं रखना।
(मेरी मां और एक बुजुर्ग महिला का साथ जो की बरसों तक चला)
धन्यवाद।
रेखा चौहान 'राज'

बहुत ही सुन्दर 👌👌👌👌
जवाब देंहटाएंहार्दिक आभार जी 🙏
हटाएंसुंदर और प्रेरणादायक संस्मरण,,,,, आज के परिप्रेक्ष्य में शायद यकीन करना भी मुश्किल हो कि कुछ दशक पहले हमारे गांव घरों में कितनी सहृदयता थी,,, रोचक यादगार,,,शिक्षाप्रद सीख,,, पुराना पेड़,,, ठंडी छांव देता है!!!
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर 🌹🌹
जवाब देंहटाएंमन को छूने वाला संवेदनशील आलेख, धन्यवाद रेखा जी
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