शुक्रवार, 8 मार्च 2024

सेना के रूप में भारतीय नारी

 लेखिका: अनामिका संजय अग्रवाल

  

खुद के कर कमलों से सज्जित

ये जग की फुलवारी है।

घर आंगन को सजाती जहां को

महकाती ये तो नारी है ।।

मन से नाजुक पर अपनों के लिए

शक्ति रूप धारिणी  ये नारी है।

भारत की नारी है निराली  हर कष्ट

की वो तो तारण हारी है।।

      घर के अंदर हो या बाहर दोनों जगह नारी एक योद्धा की तरह हर परिस्थिति में परिवार को सुरक्षित रखती है।परिवार को हर आपदा से बचाती उसकी यही कोशिश होती है कि परिवार खुशहाल रहे। आज तो नारी घर के बाहर भी कितना कुछ कर रही है। आज की नारी सेना के हर क्षेत्र में अपना प्रतिनिधित्व निभा रही है।

       भारत में नारी को शक्ति का रूप माना गया है। भारतिय सेना में 6807 से अधिक महिलाएं काम कर रही है डाक्टर पुनिता अरोड़ा 1968 में भारतीय सशस्त्र बलों में लेफ्टिनेंट जनरल और भारतीय नौसेना में वाइस एडमिरल के रूप में सर्वोच्च नम्बर तक पहुंचने  वाली पहली महिला है ।महिला अधिकारीयों को भारतिय नौसेना के युद्ध पोत पर नियुक्त किया गया है कैप्टन तानिया शेरगिल ने गणतंत्र दिवस परेड 2020 में पुरूष सैनिकों के दल का नेतृत्व किया।

        बिहार के बेगूसराय की भावना कंठ,मध्यप्रदेश के रीवा की अवनी चतुर्वेदी और बड़ोदरा की मोहना सिंह ये तीन महिलाएं 18 जून 2016 को देश की पहली महिला फाइटर के रूप हिन्दुस्तान के नभ को सुरक्षित बचा पाये।

         फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना ने कारगिल युद्ध के दौरान भारत की तरफ से पाकिस्तान से लोहा लेकर कारगिल गर्ल का खिताब जीता।

       शांति तिग्गा ने 13 लाख सुरक्षा बलों के बीच बंदूक हैंडल कर निशानेबाजी में सर्वोच्च स्थान अर्जित किया ।

खुले आसमान में अपने पंख फैलाकर उड़ने की इच्छा रखने वाली सरला ठकराल जी जीवन विषम परिस्थिति से घिरा हुआ था।

 

* सरला ठाकरे जी का जीवन परिचय *

 

8 अगस्त 1914को ब्रिटिश भारत में जन्मी साड़ी पहनकर हवाई जहाज उड़ाकर अपना परचम लहराने  वाली पहली महिला पायलट सरला ठकराल जी थी ।

      सरला ठकराल 16 वर्ष की थी तभी उनका विवाह पी डी शर्मा जी से हुआ उसके परिवार में पहले से 9 सदस्य पायलट थे फिर उनके पति के साथ से परिवार की जिम्मेदारी के बाद के बाद भी सरला जी अपने सपने पूरे कर पाई।

21 वर्ष की आयु में 4 वर्ष के बेटी की मां 1936 में सरला जी ने जिप्सी मोंठ को अकेले उड़ाया। कराची से लाहौर बीच और उसके बाद 1000 घंटे लगातार उड़ान भरकर लाइसेंस "अ" हासिल किए।

       इन्हें इस रूप में देखकर लोग दांतो तले उंगली दबाते थे कहते आदमियों के पेशे में ये औरत क्यों कोई इसे बेशर्मी कह रहा था ।शायद लोगो की नजर ही लग गई जो सरला जी को ये दिन देखना पड़ा।

          पायलट बनने से पहले ही सरला जी को अपने पति की मौत के सदमे से आहत होकर जोधपुर से लाहौर आना पड़ा।

     विपरित परिस्थिती में सरला जी मेयो स्कूल आफ आर्ट में दाखिला लेकर पेंटिंग के साथ आर्ट में डिप्लोमा लिया। 1947 में भारत पाकिस्तान विभाजन हुआ तो अपनी बेटीयों के साथ भारत आकर पी पी ठकराल से शादी करके जीवन की नई शुरुआत की। देश की होनहार महिला पायलट ने बखुबी व्यवसाय करते हुए 15 मार्च 2008 मे दुनिया को अलविदा कह दिया ।उसके संघर्ष और साहस की कहानी आज के नारी के लिए प्रेरणा है।

  84 साल पहले इतिहास रचने वाली सरला जी की जिंदगी में 1939 में दो कारणो से बदलाव आया।पहला कारण विमान क्रेश में पति की मौत और दूसरा कारण उसी साल द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ। इसके बाद ठकराल जी की जिन्दगी का रूख मुड़ना स्वाभाविक था।

  2008 में आखिरी सांस लेते हुए सरला जी ने अपने बारे में बताते हुए कहा-

     "जब मैं स्कूल में थी तब मेरा मोटो था

     हमेशा खुश रहना ,मनुष्य के तौर पर सब जानवरो से अलग हमें कुदरत का वरदान हंसी के रूप में मिला है इसलिए खुश और हंसते रहना बहुत जरूरी है ,मेरे जीवन में जो भी तकलीफ आये तो इस मोटो ने मुझे हौंसला दिया।

हिंदुस्तान की ये छोटी सी चिड़ीया।

आसमान में उड़ रही वो नन्ही चिड़ीया।।

अपने पंखों से उड़ान भर जाने वाली।

विपरीत परिस्थिती में हिम्मत रखने वाली।।

रंगो की दुनिया में अपनी पहचान बनाई।

खुद के दम पर अपनी किस्मत को चमकाई।।

 

भारतिय नारी को समाज की बंदिशों से अगर आजाद कर दिया जाये तो आसमान में अपना घर बना सकती है अपना वर्चस्व फैला सकती है सरला ठकराल जी के जीवन से यही पता चल रहा है ।

धन्यवाद| 

 

अनामिका संजय अग्रवाल

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