बुधवार, 27 मार्च 2024

माटी को बचाना है

विनोद शर्मा

माटी की उपयोगिता क्या है?  इसको इस तरह से समझा जा सकता है कि यह जीवन के पांच तत्वों में से एक है | यदि माटी (भूमि) नहीं है तो जीव का कोई भी अस्तित्व ही नहीं होगा बल्कि यों कहे तो अतिशयोक्ति नही होगी कि जीव की उत्पत्ति ही नहीं हो पाएगी | ब्रह्मांड में केवल पृथ्वी पर ही जीवन है, यह परम सत्य है | संपूर्ण जगत के जीवों में मनुष्य ही एक अकेला विवेकशील प्राणी है जो अच्छे बुरे को पहचानता है | पांच तत्वों/भूतों से बने तन को चलाने या जिंदा रखने के लिए इन्हीं पांच तत्वों या इनसे ही उत्पन्न वस्तुओं या सीधे रूप से सेवन कर जीव अपना जीवन यापन करता है या ऐसा कहे कि इन पर ही आश्रित रहता है | मनुष्य को छोड़कर सभी प्राणियों में वस्तुओं के भंडारण या एकत्रीकरण की दक्षता नहीं होती है | वह तो केवल अपने वर्तमान के लिए भोजन को जुटाने के लिए व्यस्त रहते हैं, जबकि मनुष्य में वस्तुओं को एकत्र करने/ इकट्ठा करने/ धरोहर के रूप में संजोने की क्षमता के साथ-साथ अपनी असीमित इच्छाओं को पूरा करने के लालच में हर प्रकार के दोहन करने में बना/लगा रहता है और वस्तुओं के संरक्षण के विषयों को भी दरकिनाक कर देता है | इसी कारण से मनुष्य पृथ्वी पर प्रकृति प्रदत्त वस्तुओं जैसे-धातुएं, वनस्पति, वन्य जीव, जल यानी नदियां झील सागर इत्यादि के संतुलन को बिगाड़ने में भी संकोच नहीं करता है | मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जो खुद मनुष्यों को और दूसरे प्राणियों को अपने लिए प्रयोग में लाता है |

पृथ्वी पर जन्में सभी जीवों के भरण पोषण के लिए यह धरती/पृथ्वी भरपूर वस्तुएं प्रदान करती है | इसके अनुसार एक खाद्य श्रृंखला का निर्माण होता है, किंतु मानव धरा पर ऐसा प्राणी है जो प्रकृति द्वारा बनाए गए नियमों में अपनी सुविधा अनुसार परिवर्तन करता रहता है जिसके परिणाम स्वरुप प्रकृति का संतुलन कई बार बिगड़ने की कगार पर पहुँच जाता है या बिगड़ जाता है | देखा जाए तो इसका प्रभाव स्वयं मनुष्य के ऊपर भी अन्य जीवों के साथ-साथ पड़ता है, मगर वह ऐसा कभी नहीं सोचता है कि मुझ पर भी इन कृत्यों का क्या प्रभाव पड़ेगा | सही मायने में हमारी यह धरा सभी का भरण पोषण करने में पूर्णत: सक्षम है, लेकिन यह किसी के लालच को पूरा कभी नहीं कर सकती/कर पाती है और समय-समय पर चेताती भी/ आगाह भी करती रहती है | मनुष्य केवल अपने ही विषय में सोचता या विचार करता रहता है जिसके अनुसार वह पृथ्वी पर रहकर अपने क्रियाकलापों को कार्यान्वित करता है |

वर्तमान काल में संसार की जनसंख्या वृद्धि के कारण पृथ्वी पर उसकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बहुत बड़ा दबाव पृथ्वी पर ही बढ़ता जा रहा है | सभी को खाने के लिए अन्न इत्यादि की आपूर्ति हेतु मनुष्य ने आधुनिक तकनीकी ज्ञान में वृद्धि कर इसका प्रयोग करके कृषि उत्पादन के साथ-साथ औद्योगिक क्रांति लाकर सभी यातायात घरेलू उपकरण आदि के अलावा रक्षा के क्षेत्र में युद्ध के लिए शास्त्रों का जिसमें थल, जल और वायु सभी प्रकार के शास्त्रों का विकास किया है | इस प्रगतिवाद युग में होड़ के कारण पृथ्वी पर सभी ओर से बराबर दबाव बढ़ता ही जा रहा है | इन सभी को ध्यान में रखते हुए यदि हम विचार करें कि हमने धरा की मिट्टी/मृदा की क्या दशा बना दी है? कृषि उत्पादन में वृद्धि करने के लिए हरित क्रांति जैसे कार्यक्रमों को प्रोत्साहन दिया जिससे खेतों में संकर बीजों तथा रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग अधिकतम सीमा से भी अधिक किया | आधुनिक कृषि औजारों का भी प्रयोग किया जा रहा है | कीटनाशक दवा तथा खरपतवार को नष्ट करने के लिए भी अनेक प्रकार के रसायनों का प्रयोग अत्यधिक तेज गति से किया गया है/ किया जा रहा है | 

इन सभी प्रयोगों के कारण शुरुआती वर्षों में तो प्रति एकड़ उपज की मात्रा बहुत ही उच्च स्तर से बढोतरी हुई परंतु बाद में अब धीरे-धीरे गिरावट की ओर जा रही है | ट्रैक्टरों इत्यादि के कृषि कार्य में प्रयोग करने से हमारे देश भारत में बैलों यानी परंपरागत जोत के तरीकों को पूर्णतया छोड़कर आधुनिक विधियो को अपनाया गया है | फलस्वरूप बैल धीरे-धीरे विलुप्त होता जा रहा है/गया है | इन सभी सुविधाजनक उपकरणों और रासायनिक खादों तथा अन्य दवाओं के प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता में धीरे-धीरे बड़ी गिरावट आई है | ये सभी कारक मिट्टी प्रदूषण का भी एक बड़ा कारण बना है |

इन सभी कारकों के द्वारा केवल मिट्टी की उर्वरा शक्ति ही नहीं घटी अपितु भूमिगत जल प्रदूषण की समस्या भी उभर कर सामने आई है | भूमि पर जितने भी रसायनों का प्रयोग पैदावार बढ़ाने को होता है, वे कभी समाप्त नहीं होते हैं या यूं कहें कि वे मिट्टी में ही घुल जाते हैं और रंध्रों के माध्यम से भूमि के आन्तरिक भाग में प्रविष्ट कर जाते हैं, जिससे मिट्टी और जल दोनों को प्रदूषित करते हैं | आधुनिक संकर बीजों तथा फसलों के गलत चयन (किस खेत में कौन सी फसल को बोना उचित होगा) के कारण सिंचाई के लिए भूमिगत जल का अधिक दोहन किया गया/ जा रहा है, इससे भू जल स्तर भी नीचे जा रहा है/जा चुका है | यहां पर सभी को विशेषत: किसानों का ध्यान इस ओर आकर्षित करना आवश्यक है कि खेतों में जो भी रसायन खाद, कीटनाशक और खरपतवार नाशक दवाएं डाली जाती है उससे खाद्य श्रृंखला बर्बाद होती है तथा इससे भी अधिक बात यह है कि इन सभी रसायनों का जैव आवर्धन होता है ( बायो-मैग्नीफिकेशन) अर्थात ये सभी रसायन फसलों की जड़ों के माध्यम से बीजों में जिसे मनुष्य अपने भोजन के रूप में प्रयोग करता है तथा चारे के माध्यम से पशुओं में पहुंचते हैं | साथ ही दूध और मांस आदि के माध्यम से मनुष्यों के शरीर में खाने के रूप में प्रविष्टि करता है जो पूर्णतया प्रदूषित होता है | जितना जिस गति से हम इन रसायनों का प्रयोग कर रहे हैं या बढ़ता जा रहा है उसकी उतनी ही तीव्र गति से नई-नई बीमारियां मनुष्यों और अन्य जीवों को अपनी चपेट में ले रही हैं/ लेती जा रहीं हैं |

इसमें कोई शक नहीं है कि हमें खेतों में पैदावार बढ़ानी है क्योंकि जिस तरह जनसंख्या बढ़ रही है उसी प्रकार से खाने की वस्तुओं अर्थात खाद्यान्नों की आवश्यकता भी बढ़ रही है | इसके लिए हमें उन माध्यमों के प्रयोग पर जोर देना चाहिए जिससे पैदावार भी बढ़ सके और मिट्टी तथा जल प्रदूषण होने से बचा रहे | इसके लिए हमें खेतों में जैविक खादों के प्रयोग पर जोर देना चाहिए | फसल चक्र का विशेष ध्यान रखना चाहिए, साथ-साथ खेतों में निराई गुड़ाई को करना चाहिए जिससे खरपतवार के असर को कम करने में मदद मिल सके और रसायन ना डालना पड़े | पशुधन पर ध्यान देकर जैविक खाद तथा दूध आदि के उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है |

इस प्रकार जैव आवर्धन से बचाव होगा जिससे बीमारियों का कम प्रकोप होगा | यदि हम आने वाले समय में माटी को सुरक्षित कर लेंगे तो पृथ्वी पर प्राणी जीवन को सुरक्षा प्रदान कर पाएंगे | यह सब आपसी सहयोग से ही संभव हो पाएगा वैज्ञानिक सोच समझ तथा आविष्कारों का सदुपयोग कर हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं या हमें अपना लक्ष्य प्राप्त करना चाहिए |

*माटी हमें बचानी है, जैविक खाद लगानी है, 

बैलों से खेती करनी है, पैदावार बढ़ानी है|*

धन्यवाद।

विनोद शर्मा

3 टिप्‍पणियां:

  1. सारगर्भित आलेख। समस्या की ओर ध्यान खींचने के लिए आभार

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  2. अत्यंत सारगर्भित, सटीक तथा उपयोगी लेख। इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

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