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सोमवार, 6 मई 2024

शिक्षा का महत्व

 स्कूली छात्रों और बच्चों के लिए शिक्षा पर लेख...

लेखक: डॉ.अवधेश तिवारी "भावुक"

शिक्षा एक महत्वपूर्ण उपकरण है जो हर किसी के जीवन में बहुत उपयोगी है। शिक्षा ही हमें पृथ्वी पर मौजूद अन्य प्राणियों से अलग करती है। यह मनुष्य को पृथ्वी पर सबसे बुद्धिमान प्राणी बनाता है। यह मनुष्यों को सशक्त बनाता है और उन्हें जीवन की चुनौतियों का कुशलतापूर्वक सामना करने के लिए तैयार करता है। जैसा कि कहा गया है, हमारे देश में शिक्षा अभी भी एक विलासिता बनी हुई है न कि एक आवश्यकता। शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए पूरे देश में शैक्षिक जागरूकता फैलाने की जरूरत है। लेकिन, शिक्षा के महत्व का विश्लेषण किए बिना यह अधूरा है। केवल जब लोगों को एहसास होता है कि इसका क्या महत्व है, तो वे इसे अच्छे जीवन के लिए एक आवश्यकता मान सकते हैं। शिक्षा पर इस लेख में, हम शिक्षा के महत्व को देखेंगे और यह कैसे सफलता का द्वार है।

गरीबी और बेरोजगारी को दूर करने में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है । इसके अलावा, यह वाणिज्यिक परिदृश्य को बढ़ाता है और देश को समग्र रूप से लाभान्वित करता है। इसलिए, किसी देश में शिक्षा का स्तर जितना ऊँचा होगा, विकास की संभावनाएँ उतनी ही बेहतर होंगी।

इसके अतिरिक्त यह शिक्षा व्यक्ति को विभिन्न प्रकार से लाभ भी पहुँचाती है। यह व्यक्ति को अपने ज्ञान के उपयोग से बेहतर और सूचित निर्णय लेने में मदद करता है। इससे व्यक्ति की जीवन में सफलता दर बढ़ती है।

इसके बाद, शिक्षा एक बेहतर जीवनशैली प्रदान करने के लिए भी जिम्मेदार है। यह आपको करियर के अवसर प्रदान करता है जो आपके जीवन की गुणवत्ता को बढ़ा सकता है।

उसी प्रकार शिक्षा भी व्यक्ति को स्वतंत्र बनाने में सहायक होती है। जब कोई व्यक्ति पर्याप्त रूप से शिक्षित होगा, तो उसे अपनी आजीविका के लिए किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वे अपने लिए कमाने और अच्छा जीवन जीने के लिए आत्मनिर्भर होंगे।

सबसे बढ़कर, शिक्षा व्यक्ति के आत्मविश्वास को भी बढ़ाती है और उन्हें जीवन में चीजों के बारे में निश्चित बनाती है। जब हम देशों के नजरिए से बात करते हैं, तब भी शिक्षा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पढ़े-लिखे लोग देश के बेहतर उम्मीदवार को वोट देते हैं। यह किसी राष्ट्र के विकास और प्रगति को सुनिश्चित करता है।

यह कहना कि शिक्षा ही आपकी सफलता का द्वार है, अतिशयोक्ति होगी। यह उस कुंजी के रूप में कार्य करता है जो कई दरवाजों को खोलेगी जो सफलता की ओर ले जाएंगी। बदले में, इससे आपको अपने लिए बेहतर जीवन बनाने में मदद मिलेगी।

एक शिक्षित व्यक्ति के पास दरवाजे के दूसरी तरफ नौकरी के ढेर सारे अवसर इंतजार कर रहे होते हैं। वे विभिन्न विकल्पों में से चुन सकते हैं और ऐसा कुछ करने के लिए बाध्य नहीं हैं जो उन्हें नापसंद हो। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिक्षा हमारी धारणा पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। यह हमें सही रास्ता चुनने और चीजों को केवल एक के बजाय विभिन्न दृष्टिकोण से देखने में मदद करता है।

धन्यवाद।

डॉ.अवधेश तिवारी "भावुक"

शनिवार, 10 फ़रवरी 2024

अच्छे माता-पिता कैसे बनें?

 

लेखिका: सरोजिनी चौधरी

 

आजकल अधिकतर माता-पिता यह समझते हैं कि बच्चों को अधिक से अधिक सुविधाएँ उपलब्ध कराना ही उनका सबसे बड़ा लक्ष्य है ,परन्तु ऐसा नहीं है।जब बच्चों के देख-रेख की बात आती है तो वहाँ तात्पर्य केवल धन से नहीं है।बच्चों को केवल खिलौने,अच्छे कपड़े और महँगे स्कूल ही नहीं चाहिए बल्कि उन्हें प्यार,दोस्ती,देखरेख,मार्गदर्शन और अनुशासन भी चाहिए।मैं यह बात फिर से दोहराना चाहती हूँ कि आपके प्यार और ध्यान के बिना बच्चा सही तरह से फल-फूल नहीं सकता।

आजकल कई माता-पिता ऊँचे-ऊँचे पदों पर आसीन हैं।उनका कहना है कि वे अपने बच्चों का बहुत ध्यान रखते हैं,उन्हें हर तरह की सुख सुविधा उपलब्ध है मध्यम वर्ग की अपनी अलग उलझनें हैं निर्धन परिवारों में तो परिवार का पेट भरने के लिए सबको काम करना ही पड़ता है।मैं सिर्फ़ इतना कहना चाहती हूँ कि आपकी संतान किसी भी चीज़ से पहले आपका प्यार चाहती है और इसके लिए आपको अपना समय देना होगा।

माता-पिता को बालक के विकास की सभी अवस्थाओं को अच्छी तरह समझना चाहिए और यह कार्य उसके जन्म के समय से ही आरंभ हो जाना चाहिए।कई पिता ऐसा मानते हैं कि बालक के विकास के लिए उनकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं है,यह केवल माँ का ही काम है।आपके बच्चे के लिए दोनों का समय वांछनीय है।यह भी याद रखें कि बच्चे के पास अपना दिल और दिमाग़ है अतः कभी उसे यह नहीं लगना चाहिए कि आप उसकी बात को अनसुना कर रहे हैं।आपके पास एक विशुद्ध प्रेम करने वाला हृदय है जो आपके बच्चे के लिए अनुपम उपहार है।यह उसे नया जीवन जीने की प्रेरणा देगा और बदले में आप भी असीम स्नेह वापस पायेंगे।

कुछ ज़रूरी टिप्स-

१-बच्चों के साथ समय बिताएँ।छोटे बच्चों को सदैव अपने साथ रखें,उनसे बातें करें,उनके साथ खेलें,खेल का मज़ा लें।उन्हें बाग में चिड़ियाघर और समुद्र के किनारे ले जाएँ।उनकी योग्यता और कौशल के लिए अपनी प्रतिक्रिया दें और उनके साथ हर गतिविधि को खेल में बदल दें।

२-उनके विकास की सारी अहम बातों को सहेज कर रखें जैसे विकास के हर अवस्था की तस्वीरें,उनकी कला परियोजनाओं व ड्राइंग आदि को सम्हाल कर रखें।किसी ख़ास दिन उनके साथ बैठें और मिल कर उस ख़ज़ाने को देखें।जब सारे मिलकर बचपन की सहेजी गई चीजों को देखते हैं तो वे और ज़्यादा अनमोल

लगती हैं।

३-तीसरी कक्षा में सात साल के बच्चे को कक्षा में एक निबन्ध लिखने के लिए दिया गया कि वर्ष के किसी रोचक दिन के विषय में लिखो।एक बच्चे ने उस दिन के विषय में लिखा जब उसने अपने पापा के साथ बाग़वानी की थी।अपने बच्चों को अपनी गतिविधियों में शामिल कीजिए।यदि आपको देर रात गाड़ी में घूमने का शौक़ है तो अपने बच्चे को भी साथ लेकर जाएँ।अगर आप अनुमति दें तो वह आपकी कई गतिविधियों में हिस्सेदार भी बन सकता है ।

४-हर बच्चे पर निजी तौर पर ध्यान देना चाहिए ।प्रतिदिन अपने बच्चे से बात करने के लिए थोड़ा समय अवश्य निकालें।उनकी बातों को ध्यान से सुनें,स्कूल में घटी घटनाओं को ध्यान से सुनें जिससे बच्चे को एहसास हो सके कि उनका जीवन आपके लिए मायने रखता है।

५-उन्हें अनपेक्षित और आश्चर्य से भरपूर बातों से हैरान करें।कई बार रोज़ की गतिविधियों से जीवन नीरस हो जाता है और कुछ अलग करने को मन करता है जैसे कभी बोट क्लब जाना या पिकनिक पर जाना,कभी घर में ही रोज़ के कार्य से अलग हट कर कार्य करना आदि।

६-अच्छे काम करने पर बच्चों की सराहना ज़रूर करें और ग़लत कार्यों में अपनी असहमति दर्शाएँ।कितने भी व्यस्त क्यों न हों,अपने बच्चे से बात करने के लिए थोड़ा समय अवश्य निकालें ।

याद रखेंगे कि प्यार करने से बच्चा नहीं बिगड़ता,कम अनुशासन से बच्चा बिगड़ता है।प्यार का मतलब यह नहीं कि आप उसे दूसरों पर निर्भर रहना सिखा दें,उसे ग़लत काम करने की अनुमति दें,उसे उपहारों से लाद दें और काम कराने के लिए रिश्वत दें।प्यार करने का अर्थ होता है कि आप अपने बच्चे का स्वाभिमान विकसित करें।

७-बच्चों को बताएँ कि जब वे बड़े होंगे तो अनेक अवसर उनकी प्रतीक्षा में होंगे,उनके संसार और सोच को सीमित न बनने दें।छोटे बच्चों को कहानियाँ सुनाएँ रौ जब बड़े हो जाएँ तो किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें।उन्हें संग्रहालय,प्राकृतिक स्थल,पहाड़ों तथा अन्य सुंदर स्थानों पर घुमाने ले जाएँ।अच्छा संगीत बच्चों को आकर्षित करने के लिए बजाएँ।

तो आपको इंतज़ार किसका है? आज से ही प्रारंभ करें,अपने बच्चे से सही मायने में प्रेम करें।

धन्यवाद| 


सरोजिनी चौधरी

लेखक आलेख में प्रस्तुत विचारों, व्याकरण और त्रुटियों के लिए उत्तरदायी है| पटल ने बस एक प्लेटफ़ॉर्म दिया है|

 

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