शनिवार, 9 मार्च 2024

स्वतंत्र नारी

 लेखिका: रूबी शोम

 

स्वतंत्र नारी से आप क्या समझते हैं या कहें तो परतंत्र नारी । प्रत्येक नारी को जन्म से लेकर विवाह और फिर पुत्र सभी पर अधीन रहना पड़ता है नारी पहले पिता के घर पर अपने पिता के कहे अनुसार, विवाह के बाद पति के कहे अनुसार, उसे चलना पड़ता है और फिर पुत्र के कहे अनुसार, चलना पड़ता है दुनियां चाहे जितनी भी तरक्की कर ले पर नारी का कहां और कितना स्थान होता है, घर परिवार और समाज में यह बात किसी भी नारी से छुपी नहीं है।नारी को हर बात में चुप करा दिया जाता है, नारी स्त्री हर जगह पर मौन रहकर ही कार्य करती है नारी को अपनी बात कहने अपने विचारों को व्यक्त करने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए यह बात पहले घर परिवार और समाज को समझनी चाहिए नारी की बात सुनकर उसके विचारों का सम्मान करना चाहिए तभी एक स्त्री अपने स्वतंत्र होने पर सभी कार्य कर सकती है और इसमें बहुत बड़ा योगदान एक नारी के लिए एक नारी का होना चाहिए जब तक एक स्त्री दूसरी स्त्री का साथ नहीं देगी उसको आगे नहीं बढ़ाएगी तब तक एक स्त्री आगे नहीं बढ़ सकती है हमें नारी के उत्थान के लिए स्त्री और पुरूष दोनों को मिलकर यह कार्य करना होगा तभी एक नारी आगे बढ़कर एक सशक्त नारी एक स्वतंत्र नारी बन सकती है इसमें पिता ,भाई ,पति और पुत्र को अहम भूमिका निभानी पड़ेगी तभी स्त्री एक स्वतंत्र नारी के रूप में अपना जीवन यापन कर सकती है।

धन्यवाद| 

रूबी शोम

8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही बढ़िया प्रयास सभी को बधाई। खास तौर पर हिंमाँशुशेखर जी की मेहनत रंग लाई।

    रेखा अस्थाना

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. धन्यवाद रेखा जी। मैंने एक प्रयास किया है कि समूह का ब्लॉग प्रकाशित हो। बाकी तो सब रचनाकारों की मेहनत है। मुझ पर विश्वास रखने के लिए सबका आभार।

      हटाएं
  2. बहुत सकारात्मक आलेख। स्वतंत्रता के पहलूओं को समझाते हुए नारी को प्रगतिशील बनाने का सुंदर प्रयास। बहुत खूब। हार्दिक बधाई रूबी जी।

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर और अच्छा लेख रूबी जी

    जवाब देंहटाएं
  4. एक अच्छा प्रयास(सरोजिनी)

    जवाब देंहटाएं

ब्लॉग का अद्यतन पोस्ट :

कैसे लिखें, अच्छी कविता..? भाग 02

पिछले 30 दिनों में सबसे ज्यादा देखा गया पोस्ट