लेखिका: सरोजिनी चौधरी
आये दिन समाचारपत्रों में तथा न्यूज़ चैनलों पर
आतंकवाद की खबर देखकर मन आक्रोश से भर जाता है। आख़िर कब तक बेगुनाह जनता इन मुट्ठी भर आतंकवादियों के आतंक का शिकार होती रहेगी।बल और अधिकार की प्राप्ति का यह अर्थ बिल्कुल नहीं होता कि उस बल का प्रयोग निर्बल को संतानें के लिए किया जाए। अचानक मुझे कवि नीरज की ये पंक्तियाँ याद आ गईँ—
अब तो मज़हब भी कोई ऐसा चलाया जाए
जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए
आग बहती है जहाँ गंगा में झेलम में भी
कोई बतलाए कहाँ जा के नहाया जाए।
आतंकवाद से त्रस्त जनता के लिए कोई स्थान सुरक्षित नहीं है।कभी दिल्ली,कभी मुंबई,कभी श्रीनगर,आए दिन धमाकों की आवाज़ से लोग धुएँ और राख की चादर से लिपट जाते हैं। पटरी पर चलते जीवन के पहिए पटरी से उतर जाते हैं।जब तक लोग हादसे को भुला सामान्य होते हैं तब तक एक नया हादसा हो जाता है।
हमारे देश में कुछ ऐसे तंत्र हैं जो मौक़े का फ़ायदा उठाने ,एक दूसरे को भला-बुरा कहने,दंगा-फ़साद फैलाने के अतिरिक्त और कुछ नहीं करते।वे तो ऐसे अवसर की प्रतीक्षा में आँखें बिछाये रहते हैं।
आतंकवाद से केवल हमारा देश ही त्रस्त नहीँ है बल्कि पूरी विश्व ही त्रस्त है।
अमेरिका,ब्रिटेन आदि देश इसके दंश का अनुभव कर चुके हैं। भारत ने बार-बार दुनिया को ध्यान दिलाया है कि इन आतंकवादी शक्तियों को पड़ोसी देशों में आश्रय मिल रहा है प्रशिक्षक प्रेरणा के रूप में ।प्रमाणों से सिद्ध जिन आरोपों को भारत लंबे समय से अमेरिका के समक्ष रख रही है,उस ओर अमेरिका का रुझान क्यों नहीं है?
उभरते हुए खतरे
• कई आतंकवादी संगठनों में एक-दूसरे के साथ सहयोग करने तथा आवश्यक रूप से वैचारिक बंधनों की भागीदारी किये बिना शस्त्रों की आपूर्ति, संभार तंत्र और यहाँ तक कि प्रचालनात्मक समर्थन के रूप में संपर्क निर्मित करने का सामर्थ्य है। ऐसे नेटवर्क अपने विनाशात्मक उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिये संगठित आपराधिक संगठनों से भी समर्थन प्राप्त करने में सक्षम हैं।
• 21वीं सदी में आतंकवाद ने नवीन और अधिक घातक आयाम प्राप्त कर लिया है। उन सामग्रियों और प्रौद्योगिकी जिनमें पूर्व की तुलना में बहुत अधिक विनाशक क्षमता है, तक पहुँच ने भी आतंकवाद द्वारा उत्पन्न खतरे की प्रकृति को बढ़ा दिया है।
• एक बहुसांस्कृतिक विश्व में प्रवासियों की बड़ी आबादी और आवागमन के विविध मार्गों वाली सीमाओं का अर्थ है कि प्राय: इंटरनेट का प्रयोग करते हुए आतंकवादी विचारधारा के प्रचार के माध्यम से उत्पन्न स्लीपर सेल लोकतांत्रिक देशों के राष्ट्रीय ढाँचे को खतरा पहुँचाते हुए पाँचवा कॉलम बन सकते है।
• किसी देश में शत्रु देश के समर्थकों या उनसे गुप्त सहानुभूति रखने वाले लोगों का ऐसा समूह जो जासूसी या विध्वंसात्मक गतिविधियों में शामिल हो, उन्हें पाँचवा कॉलम (Fifth column) कहते है।
• राष्ट्रीय सीमाओं के आर-पार धनराशियों के तीव्रतर आवागमन के साथ राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं, बैंकिंग और वित्तीय प्रणालियों का एकीकरण भी विश्व भर में आतंकवादी गतिविधियों का वित्तीयन सरल बनाता है।
भारत में आतंकवाद के नियंत्रण हेतु उठाए गए कदम
भारत विश्व में आतंकवाद से सर्वाधिक प्रभावित देशों में से एक है। ‘इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस’ की मानें तो वर्ष 2018 भारत आतंकवाद से 7 वाँ सर्वाधिक प्रभावित देश था। आजादी के बाद से ही भारत में अनेक आतंकवादी घटनाएं घटित होती रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2001 से 2018 के मध्य भारत में आतंकी हमलों के कारण 8000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। ऐसे में, भारत सरकार ने इसे नियंत्रित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं, जो निम्नानुसार हैं-
• सभी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के लिए भारतीय संसद ने वर्ष 1967 में ‘गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम’ (UAPA) पारित किया था तथा इसे और प्रभावी बनाने के लिए वर्ष 2004 में इसमें संशोधन भी किया गया था।
• भारतीय संसद में वर्ष 1987 में आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए ‘आतंकवादी और विघटनकारी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम’ (TADA) पारित किया था।
• वर्ष 2002 में भारतीय संसद में ‘आतंकवाद निवारण अधिनियम’ (POTA) भी पारित किया था इसका उद्देश्य भी आतंकवादी गतिविधियों से निपटना था।
• भारत के मुंबई में हुए कुख्यात 26/11 आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार ने ‘राष्ट्रीय जांच एजेंसी’ (NIA) का गठन किया था।
• इसके अलावा, भारत सरकार ने विभिन्न खुफिया एजेंसियों का गठन किया है, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद से निपटने के लिए कार्य करती हैं। इनमें ‘रिसर्च एंड एनालिसिस विंग’ (RAW), ‘इंटेलिजेंस ब्यूरो’ (IB) आदि संस्थाएं प्रमुख हैं।
• भारत सरकार ने ‘राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड’ (NATGRID) का निर्माण भी किया है। इसका उद्देश्य विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के डेटाबेस को आपस में जोड़ना है, ताकि ये सुरक्षा एजेंसियां बेहतर सामंजस्य के साथ कार्य कर सकें।
• भारत सरकार ने आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के लिए ‘राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड’ (NSG) नामक एक अर्ध सैनिक बल का गठन भी किया है।
• इसके अलावा, भारत ‘फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स’ (FATF) नामक अंतर्राष्ट्रीय संगठन का भी सदस्य है, जो मुख्य रूप से धन शोधन व आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने का कार्य करती है।
उपसंहार
मेरी राय में तो इस समस्या का समाधान सबको मिलकर ही करना होगा।इस क्षेत्र में काफ़ी कुछ किया गया है और अभी और बहुत कुछ करने की आवश्यकता है।अपने ही लोग जब घातक कार्यों में लग जाते हैं तो यह चिंता का विषय हो जाता है।आवश्यकता है उनकी सोच को निर्मल करने की,जब तक अंतर से आवाज़ नहीं उठेगी कि ग़लत काम नहीं करना तब तक इसे रोकना संभव न होगा ।कुछ नियम,कुछ सतर्कता,लोगों का जागरुक होना,यह सब आवश्यक है।श्री विजय खेड़ा ने ठीक ही कहा है-“यदि हम समस्या के समाधान का हिस्सा नहीं हैं तो स्वयं एक समस्या हैं।”
धन्यवाद|
लेखिका का जीवन परिचय
इलाहाबाद में पली-बढ़ी सरोजिनी जी की शिक्षा वर्तमान प्रयाग राज (इलाहाबाद) में संपन्न हुई।विवाहोपरांत जबलपुर में रहना हुआ। तेईस वर्ष तक अध्यापन कार्य करने के उपरांत सेवानिवृत्त हो गईं।लेखन कार्य में रुचि पहले से ही थी।समय मिलने पर कविताएँ लिखती थीं,उनकी कई कविताएँ समाचार-पत्रों में छपती थी।करोना काल में ऑन लाइन पटल मिला और तब से लेखन कार्य को गति मिली।
अब विभिन्न पटलों से जुड़ी हुई ऑन लाइन और ऑफ लाइन कवि सम्मेलनों में भाग लेती हैं।आपकी दो पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं-पहली “काव्य-नीर” और दूसरी “शब्द पंख बन उर से निकले”।कई साझा संकलन भी प्रकाशित हुए हैं जैसे किलकारी,ऊर्जिता,सबके राम,माँ मान बेटी सम्मान,बापू आदि।
लम्हे ज़िंदगी के द्वारा साहित्य भूषण,साहित्य सुगंध ,साहित्य विभूषण एवं साहित्य संयोग तथा अन्य मंचों के द्वारा सम्मानित निरंतर साहित्य साधना में लगी हुई हैं।

शोधपरक, सुगठित सुन्दर आलेख, धन्यवाद और बधाई सरोजिनी जी।
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत धन्यवाद शैली जी
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