गुरुवार, 20 जून 2024

यात्रा वृत्तांत चकराता

लेखिका: डॉ पूजा भारद्वाज

हेलो दोस्तों कहां हैं सभी, आओ चलो चलते है एक ओर यात्रा पर, पहाड़ों पर ,बादलों के पास हरियाली के पास यानी उत्तराखंड में एक और सुंदर जगह चकराता ,हम और हमारे एक दोस्त और उनकी फैमिली भी साथ गई थी क्यूंकि बाहर जाओ तो दोस्तों और फैमिली के साथ रास्ते का मज़ा दुगना हो जाता है ,तो सोमवार की सुबह 6 बजे निकल गए हम चकराता के लिए दिल्ली से आप गूगल बाबा की सहायता से सीधे पहुंच सकते हैं,हमारी गाड़ी भी सरपट रोड पर दौड़ रही थी, और चल रहे थे मेरे पसंदीदा गाने , सोनू निगम,इस कदर प्यार ...किशोर कुमार  के गाने जिससे बच्चे बोर हो रहे थे और वो सुन रहे थे अपने गाने इयरबर्ड लगा कर,अब समय हो चुका था 9:30 पेट भी कुछ बोल रहा था ,

मगर हम ने सीधे अपने रिसॉर्ट का मैप डाला था ,तो सीधे हम सहारनपुर होते हुए विकास नगर के रास्ते में आ गए , आप सोचोगे तो क्या हुआ हुआ ये हमने सोचा देहरादून नाश्ता करेंगे मगर देहरादून  पड़ा ही नहीं , और रास्ते में चीतल,हल्दीराम,बीकानेर छोड़ सीधे चले जा रहे थे अब क्या होता अब रिसॉर्ट तो भूल गए ,अब टारगेट था एक अच्छा सा होटल या ढाबा  खाने के लिए जो मिला विकास नगर से 2 किलोमीटर पहले डिवाइन होटल ,यदि आप के साथ भी ऐसा हो तो आप भी यहां खाना खा सकते है अच्छा होटल है , आलू पराठें , छाछ अच्छी थी अब हमारा पेट फुल था अब हम चल पड़े अपने रिसोर्ट की तरफ जहां हम पहुंचे दोपहर 2 बजे समय से ही पहुंच गए हमारे रिसोर्ट का नाम था साइड्स गैलेक्सी रिसॉर्ट , एक पहाड़ी की चोटी पर बना हुआ, बहुत सुंदर प्रकृति के बिल्कुल नजदीक , नजारे बहुत सुंदर मानो धरा ओर गगन मिल रहे हो ,यदि आप वीडिओ देखना चाहते हो तो मेरी इंस्टा पर रील देखना ,फिर शाम को प्रॉपर्टी घूमे, लोगों से मिले खाना खाया और सो गए ।

सुबह उठे पूरी एनर्जी के साथ नाश्ता किया ,तैयार हुए  अब हम रेडी थे टाइगर फाल्स जाने के लिए नेटवर्क issue बहुत है तो गाने तो चले नहीं मगर बाहर के नज़ारे बहुत अच्छे थे तो डेढ़ घंटे की रोड ड्राइव कर के हम पहुंचे टाइगर फाल्स की जगह वहां से थोड़ी सी ट्रेकिंग कर के टाइगर फाल्स तक जा सकते थे तो हमने की ट्रेकिंग और पहुंच गए चकराता की पहली डेस्टिनेशन पर नजारे सुंदर थे ,काफी लोग नहा रहे थे ,चेंजिंग रूम भी थे बहुत ऊंची पहाड़ी से गिरता टाइगर फाल्स ,मगर crowd था मैं तो नहीं नहाने गई बहुत ठंडा पानी था पैर जरूर डाले और 2 मिनट के लिए मेरे पैर सुन हो गए क्यूंकि पानी बहुत ठंडा था , बच्चे तो बच्चे होते हुए उन्होंने खूब एंजॉय किया पहाड़ों पर जाओ और मैग्गी न खाओ ऐसे कैसे हो सकता है हमने वहीं मैग्गी खाई चाय पी पर चाय अच्छी नहीं थी फिर निकल गए हम कुछ खाने के लिए चकराता माल रोड  पर फेमस चांदना mom's पर आधा घंटे की ड्राइव कर के पहुंच गए मगर माल रोड अच्छा बिल्कुल नहीं था मगर अच्छे थे चांदना शॉप के मोमोज जो हम खाने गए थे तो जाना सफल हुआ और यम्मी सी कोल्ड कॉफी तो यदि आप को मोमोस पसंद है तो आप यहां आ सकते है नहीं तो समय बरबाद न करे और आगे चले तो हम पहुंच गए अपने रिसोर्ट और शाम के समय पहुंचे sunset प्वाइंट पर समय था तो हमने वहां खूब मस्ती की रोड खाली था तो रील बनाई ,फोटो के बिना तो सब अधूरा है फिर रूम पर चले गए अगले दिन हम सब को कई जगह जाना था ,ये बुधवार की सुबह हमेशा की तरह जल्दी उठी और चाय तो 8 बजे मिलेगी , तो मैंने अपनी इंस्टेंट चाय बनाई जिसकी रेसिपी मेरे चैनल पर है ,चाय पी और रिसेप्शन पर गई ट्रैवल पेंपलेट लिया और आज की यात्रा का प्लान बनाया ,  budher caves जहां पांडव अपने वनवास के दौरान छुप कर रहे थे, कंसार वन ,देवबन एक ऐसा वन क्षेत्र जहां देवदार के विशाल वृक्ष थे , रामताल उद्यान।  नाश्ता किया और निकल गए, कम से कम दो से ढाई घंटे का सफर था नज़ारे बहुत सुंदर जो आप मेरी फोटो ग्राफी में देखेंगे और वीडिओ मेरी इंस्टा id पर वाह प्रकृति की सुंदरता देखते ही बनती थी,धरती और गगन एक दूसरे से मिलने आतुर थे और तेज हवाएं कानों में एक संगीत सा सुना रही थी और बारिश सरगम की ताल छेड़ रही थी इतना सुंदर दृश्य , मैं बारिश में निकली और मेरे कदम भी झूमे बिना नहीं रह सके ,छम छम...........



नजरों के बीच हम पहुंच गए budher  caves पर हमारा दुर्भाग्य कनासर  पहुंचते ही जिस जगह से हम तीन किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी थी  budher caves  पहुंचने के लिए तभी बहुत तेज़ बारिश और ओले गिरने लगे , रास्ता छोटे छोटे चिकने पत्थरों वाला था पानी से दुर्गम ही गया था , बस हमारा caves का सफर बारिश ने रोक दिया , हम ने  वहीं देव वन में फोटो क्लिक किए और  प्रकृति बारिश के मज़े लेते हुए  चकराता चौक  पहुंच गए ,इस ठंडे मौसम में  गरमा गर्म चाय और पहाड़ों की तीखी सी मेगी , वाह क्या बात थी और ओले तो इतने बड़े बड़े गिरे कि मानो छोटी टेबल टेनिस की बाल, थोड़ी देर रुके फिर हम पहुंच गए अगले स्पॉट  चिरमिरी टॉप वहां जा कर ऐसा लगा कि लद्दाख में आ गए ,colorfull झंडे काले काले  बादल मौसम 12  से 10 डिग्री होगा बहुत ठंड गर्म कपड़े  हम ऊपर ले नहीं गए थे  नजारे कैसे थे आप मेरी फोटो में देखना क्यूंकि कुछ  बातों का वर्णन नहीं किया जा सकता ..




अब हम रिसोर्ट आ गए .. थकान बहुत थी डिनर किया और सो गए अगले दिन घर निकलना था ,सुबह के सूरज के साथ उठी और मेरी मस्ती चालू मैंने पति देव से कहा चलो ट्रेकिंग कर के आते हैं जवाब सब जानते हैं , और वो ट्रेकिंग हमारे रिसोर्ट से ही निकल रही थी मगर मना कर दिया मैं कहा मानने वाली थी बच्चों को उठाया और ट्रेकिंग के लिए चली गई ।

वहां से  हिमालय की चोटियां दिख रही थी, ऊंची चोटी पर थे हम फिर नीचे आ गए .. तैयार हुए नाश्ता किया और घर के लिए निकल लिए....आ अब लोट चले .......ये थी चकराता थी आखरी रील 

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डॉ पूजा भारद्वाज

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