लेखिका: स्मृति श्रीवास्तव
जल ही जीवन है। जल है तो हम हैं । ये पूरी सृष्टि ही जल पर आश्रित है
क्योंकि जल ही जीवन का आधार है। आज मानव प्रगति के नाम पर प्रकृति से खिलवाड़ करके
न केवल उसकी सुंदरता को नष्ट कर रहा है, बल्कि
स्वयं को भी हानि पहुंचा रहा है। वृक्षों के कटने से वन समाप्त हो रहे हैं, वर्षा ऋतु का चक्र भी असमतल हो गया है, नदियां सूखती जा रही हैं ।
धरती पर समस्त जीवन चक्र को बनाए रखने के लिए जल अनिवार्य है अतः जल
को प्रभु का रूप माना गया है। नदियों को
इसीलिए हम पूजनीय मानते हैं।प्रतिभा संपन्न साहित्यकार रवींद्रनाथ टैगोर ने एक
स्थान पर कहा है कि ये नदियां भगवान की धारावाही करुणा हैं। पानी समदृष्टा है, सबकी प्यास बुझाता है : न किसी से ईर्ष्या करता
है, न किसी से द्वेष। जिस प्रकार ईश्वर सब
पर समान रूप से कृपा दृष्टि रखते हैं, सबको
प्यार करते हैं, उसी प्रकार निर्मल जल भी सबके लिए समान
रूप से हितकारी है।
जल का गुणधर्म है कि वह अपनी कक्षा समान बना लेता है। उसमें ऊंच नीच
का कोई भेदभाव नहीं। कहीं से भी पानी निकाला जाए , आसपास का पानी तुरंत दौड़कर गड्ढा मिटा देता है और समतल हो जाता है।
सच्चा साम्य इसी को कहते हैं। आदिकवि वाल्मीकि ने जल की तुलना सज्जनों के मन से की
है। पंपा सरोवर का जल कैसा है?? इसके
उत्तर में उन्होंने कहा है~"सज्जनानाम मनो यथा।"
इस प्रकार से जल उदार है, सम
वृत्ति रखता है, समान स्नेह करता है। भूमि के उदर को
आर्द्र रखता है।तुकाराम महाराज जी ने भी कहा है कि पानी तो तरल पदार्थ है, उसमें अहंकार नहीं है, इसीलिए वह सब जगह सरलता से पहुंच जाता है।
दूसरे से एकरूप होना जल का स्वभाव है।
जल हममें ऊर्जा का संचार करता है,जीवन
देता है, हममें उमंग, उल्लास और आनंद भर देता है।इसकी शक्ति अपरिमित
है। इसमें बिजली है और अग्नि भी।
जब सूर्य उदित होता है तो जल की छोटी सी बूंद हरे पत्ते पर मोती की
तरह चमकती हुई आंखों को अलौकिक तृप्ति प्रदान करती है और घास पर पड़े ओस कण की सुंदरता देखकर हृदय पुलकित हो उठता है। कल
कल निनाद कर बहते झरने अपने मधुर संगीत से मन को भावविभोर कर देते हैं।संसार की
सारी कारीगरी इसके आगे कुछ भी नहीं है। सचमुच जल परमात्मा की कृपा का स्रोत है और
हम सबके जीवन का आधार भी। आइए हम सब मिलकर इसका संरक्षण करें और धरती पर रहने वाले
सभी जीवों का जीवन बचाएं !!!
धन्यवाद|
लेखिका: स्मृति श्रीवास्तव

समस्या को उकेरता, सरगर्भित लेख। बधाई ऐसे उत्तम लेखन के लिए।
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