लेखिका: डॉ.रश्मि चौबे
होली का दिन था ।सुबह से सभी बड़ों और छोटों को होली की बधाई देना लेना हो रहा था। आज रोशनी के घर उसकी कुछ सहेलियां आई हुई थीं होली मिलने रोशनी के पैर में चोट आने के कारण और उसके परिवार में सूतक है(किसी की मृत्यु या जन्म होने पर 10या13दिन लगता है)।कल होली खेलने सोसाइटी में नहीं गई इसलिए वहां की सारी सखियां मिलने चली आई थीं। रंगों में मिले केमिकल के कारण या खाने की वजह और गीले होने के कारण किसी को बुखार,तो किसी की आँख में रंग चला गया, चाय पीते हंसी ठहाकों के साथ सभी जिंदगी के रंगों और रूपों पर चर्चा कर रहे थे ।सभी कह रही थीं पिछली बार की होली कितनी अच्छी थी रोशनी सचमुच बहुत अच्छी व्यवस्था थी और हमने बहुत इंजॉय किया था । रोशनी अचानक उनके जाने के बाद एकांत में बैठी तो जैसे कलम ने कहा कि, विचारों के रंगों को पन्नों पर उडेल दो, होली है भाई। रोशनी पिछली होली की और इस बार की होली की तुलना करने लगी ।पिछले वर्ष अपने कर्तव्यों को निभाते हुए सोसायटी के लोग अच्छे से होली का आनंद उठा पाऐं इस व्यवस्था के कार्यभार को सुचारू रूप से निभाने में लगी हुई उसने समाज में व्याप्त अनेक रंगों में स्त्री पुरुषों की मानसिकता समझी ।कुछ लोग सहयोग दे रहे थे उसके साथ तो, कुछ उसकी बनी बनाई बात को बिगाड़ने में लगे हुए थे ।सच ,आज समाज में एक के साथ एक ग्यारह नहीं बल्कि एक से घटकर शून्य करने की मानसिकता अधिक प्रबल है। स्वयं के नाम के लिए इंसान अच्छे से अच्छे कार्यक्रम में जहर फैलाने में माहिर दिखाई देते हैं । तभी उसे याद आया कि ,कुछ दिन पहले ही ज्यादातर युवा जो उससे मिले थे, उसके पूछते ही कि आप क्या कर रहे हैं? उत्तर में कहा कि, मनोविज्ञान में एम.ए. कर रहे हैं ,इसका बहुत स्कोप है आंटी।इन शब्दों का अर्थ शायद समझ आज आ रहा था । इस बार की होली में पैरों में चोट के कारण वह होली खेलने के लिए तो जा नहीं पाई।रोशनी ने सोचा बचपन से ही उसे होली कहां पसंद थी पर शादी के बाद होली खेल लेती थी पर आज विचार उसे कुछ और ही समझना चाहते थे।
उसे अचानक में घर में अलग-अलग तरह के रंग दिखाई देने लगे सर्वप्रथम उसे खाने की टेबल पर रखे हुए हरेअंगूर और केसरिया संतरे, लाल सेब और पीला पपीता फलों में अलग-अलग रंग टेबल पर दिखाई देने लगे फिर जैसे ही वह भोजन की व्यवस्था देखने गई तो उसे दिखा कि, हरे रंग की मूंग दाल ,काले रंग की उड़द दाल, लाल रंग की मसूर और पीला चना और सब्जियां भी अलग-अलग रंग की रंगों से भरी हुई फ्रिज खुला तो लाल टमाटर, हरी मिर्च, बैगनी रंग का बैगन ,पीले रंग का नींबू अलग-अलग रंग दिखाई दे रहे थे।सतरंगों से सजा हुआ घर फिर जैसे ही वह बालकनी में गई तो प्रकृति कह उठी देखा, तुमने पौधों में पानी देकर मुझे पीले गेंदे ,नीली अपराजिता ,लाल रुकमणी के फूल ,सफेद सदाबहार और हरे पौधे से सतरंग कर दिया है तुमने मुझे रंग दिऐ हैं इसलिए आज मैंने तुम्हारे घर को रंगों से भर दिया है । उसकी नजर हाथ में पहने नवरत्न और रंगे हुए नाखूनों पर भी पडी रंग ही रंग दिखाई देने लगे ।शाम हुई तो सामने चाँदनी की रोशनी के रंग दिखाई दिए।उसे याद आया सुबह सूरज भी होली खेलने आया था फिर ,सामने की भी चारों ओर जो कारें सड़क पर चल रही थीं उनकी लाइटें थीं। उसके प्रकाश ने उसका ध्यान आकर्षित किया, लाल रंग की और सफेद रंग की कार की लाइट दिख रही थी वो सब प्रकृति में रोशनी भरते हुए लग रहे थे और कहीं ना कहीं रोशनी आत्मा को भी प्रकाशित कर रही थी।
अचानक गुड़िया ने कहा आंटी आपकी चाय और अंकल की कॉफी दोनों एक ही टेबल पर रख दिए हैं और साथ ही साथ मोबाइल पर ग़ज़ल गूंज रही थी और पति साथ-साथ गा रहे थे ‘आप जिनके करीब होते हैं ,वह बड़े खुशनसीब होते हैं ।समझ में आ गया था ईश्वर ने समझा दिया था कि, होली तन को नहीं मन को भी रंगती है।रोशनी को महसूस हो रहा था कि , परमात्मा के रंगों ने चारों ओर से रंग दिया है । बेटे ने भी वीडियो काल पर इंद्रधनुष (रेनवो) दिखाकर कहा माँ विदेश में होली नहीं होती पर ये रंग आपके लिए हैं। रोशनी भाव विभोर हुई।दूसरे दिन सुबह-सुबह रोशनी की भाभी (जोदिल्ली वीजा बनवाने आई थी रोशनी के घर ठहरी थी)ने उठकर कहा कि,दीदी मैं आपके मंदिर में पूजा कर देती हूं। रोशनी के कहा ,कहा सब रंगों के फूल तोड़कर प्रभु को अर्पित कर दो और फिर वो गाने लगी ‘आप जिनके करीब होते हैं, वह बड़े खुशनसीब होते हैं ‘पंकज उदास कलाकार तो चले गए पर उनके गाए शब्द बहुत कुछ समझा गए।
जिस दिन मैंने ये लेख लिखा मेरे पतिदेव ने एयरपोर्ट से फूलों की पिचकारी का फोटो भेजा जैसे मेरे लेख पर मोहर लग गयी।
धन्यवाद।
डॉ.रश्मि चौबे , गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत













