लेखक: डॉ हिमांशु शेखर
जय श्री राम
प्रस्तावना
भगवान श्री राम का जन्म दिन धूमधाम से रामनवमी के दिन पूरे विश्व में मनाया जाता है| रामकथा में भगवान राम को बारह कलाओं से युक्त विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है| यह कथा इतने रूपों में धरा पर उपस्थित है कि प्रामाणिकता पर हमेशा सवाल उठते है| पर प्रमाणिकता पर सवाल उठाने से ज्यादा सही ये लगता है कि इस कथा में राम के अवतरण और महात्मय को खोज कर भक्ति का मार्ग स्थापित किया जाए|एक और विसंगति है - जन्मदिन को जयंती कहते है - हनुमान जयंती, सीता जयंती, महावीर जयंती, गुरू नानक जयंती, गीता जयंती....। तो भगवान श्रीराम के जन्मदिन को राम नवमी की जगह राम जयंती कहना चाहिए।
भगवान राम का जन्म 10 जनवरी, 5114 ईसापूर्व को सुबह 12 बजकर पांच मिनट पर हुआ था। यह जानकारी 'यूनीक एग्ज़िबिशन ऑन कल्चरल कॉन्टिन्यूटी फ़्रॉम ऋग्वेद टू रोबॉटिक्स' नाम की एक रिपोर्ट में दी गई है। डॉ॰ वर्तक ने अपने ग्रंथ 'वास्तव रामायण' में ग्रहगतियों के आधार पर गणित करके राम की जन्म-तिथि 4 दिसंबर, 7323 ईसापूर्व बताई है। उनके मुताबिक, इसी दिन दिन में 1:30 से 3:00 बजे के बीच राम का जन्म हुआ होगा।
इसपर एक पुनरावलोकन किया जा सकता है। वाल्मीकि के अनुसार श्रीराम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी तिथि एवं पुनर्वसु नक्षत्र में जब पांच ग्रह अपने उच्च स्थान में थे तब हुआ था। इस प्रकार सूर्य मेष में 10 डिग्री, मंगल मकर में 28 डिग्री, बृहस्पति कर्क में 5 डिग्री पर, शुक्र मीन में 27 डिग्री पर एवं शनि तुला राशि में 20 डिग्री पर था। (बाल कांड 18/श्लोक 8, 9)।
शोधकर्ता डॉ. पीवी वर्तक के अनुसार ऐसी स्थिति 7323 ईसा पूर्व दिसंबर में ही निर्मित हुई थी, लेकिन प्रोफेसर तोबयस के अनुसार जन्म के ग्रहों के विन्यास के आधार पर 10 जनवरी 5114 ईसा पूर्व हुआ था। उनके अनुसार ऐसी आकाशीय स्थिति तब भी बनी थी। तब 12 बजकर 25 मिनट पर आकाश में ऐसा ही दृष्य था जो कि वाल्मीकि रामायण में वर्णित है। ज्यातादर शोधकर्ता प्रोफेसर तोबयस के शोध से सहमत हैं। इसका मतलब यह कि राम का जन्म 10 जनवरी को 12 बजकर 25 मिनट पर 5114 ईसा पूर्व हुआ था।
जन्म की भूमिका
श्री राम का जन्म संतो के उद्धार और दुर्जनों के नाश के लिए हुआ था| उनके जन्म को सार्थक करने के लिए इतनी ज्यादा कथाएँ पंक्तिबद्ध है कि उनको जोड़कर सक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करना भी एक रचना का निर्माण कर सकता है| श्री राम जन्म की सबसे बड़ी आवश्यकता रावण के संहार की थी| स्वर्गाधिपति इंद्र को परास्त कर रावण वास्तव में अपने पुत्र इन्द्रजीत की मदद से विश्व विजयी हो गया था| पर विश्व विजय करना एक सामान्य बात थी, परेशानी इस बात से थी कि वो संतो ऋषियों, मुनियों की तपस्या, यज्ञ, पूजन आदि में अड़चन पैदा करने लगा था| वो अत्याचारी हो गया था और उसको मारने का सामर्थ्य सिर्फ भगवान के अवतार द्वारा ही संभव था| वास्तव में वह भगवान बिष्णु के द्वारपाल जय विजय में से एक का पुनर्जन्म था, जिसे तीन जन्मो तक भगवान के हाथो मरने का शाप मिला था|पिछले जन्म में वो दोनों हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष बन कर पैदा हुए थे और भगवान विष्णु के नरसिंह और वाराह अवतारों द्वारा मारे गए थे। त्रेता में वे रावण और कुंभकर्ण बनकर पैदा हुए थे। द्वापर में कंस और शिशुपाल बनकर पैदा होना था। फिर भगवान के अवतार श्रीकृष्ण द्वारा मरने के बाद तीन जनँम तक भगवान के द्वारा मारे जाने का शाप पूर्ण होना था।
दूसरा
प्रयोजन था मनु और शतरूपा को भगवान द्वारा दिया गया वरदान जिसमें मनु शतरूपा ने
वरदान माँगा था कि आपके सामान ही मुझे पुत्ररत्न प्राप्त हो| भगवान ने कहा था कि
अपने सामान व्यक्ति खोजने से अच्छा है मै स्वयं आपका पुत्र बनाकर जन्म लूंगा| इस वरदान
के फलित होने के लिए भी भवान का अवतार लेना आवश्यक था| त्रेता युग में मनु दशरथ के
रूप में और शतरूपा कौसल्या के रूप में धरती पर आई थी|
तीसरी
कथा थी नारद के काम-विजय के मिथ्या अभिमान के मोह भंग की| नारद में उत्पन्न मोह के
निराकरण के लिए भगवान ने एक राज्य की राजकुमारी के स्वयंवर की माया नारद जी के
मार्ग में उत्पन्न की| नारद उस कन्या से विवाह हेतु एक सुन्दर रूप बनाने की
प्रार्थना लेकर भगवान के पास गए| उन्होंने ने माँगा| पर पर्यायवाची शब्द होने के कारण भगवान
ने उन्हें वानर का मुख प्रदान कर दिया| स्वयंवर में राजकुमारी ने भगवान का वरण
किया| जब नारद जी का भ्रम टूटा तो उन्होंने क्रोध में भगवान को पत्नी विरह का शाप
दिया तथा वानर की सहायता से पत्नी मिलन की व्यवस्था होगी ऐसा भी कहा|
एक
प्रतापभानु की कथा भी इस सन्दर्भ में दिखती है, पर उसका सूत्र और प्रामाणिकता अन्य श्रोतों में खोजना थोड़ा जटिल है|
जन्म का दिन और लीला
कंब रामायण के अनुसार राम के
जन्म के समय मेष (चैत्र) मास था, नवमी तिथि थी, नक्षत्र पुनर्वसु था, श्रेष्ठ लग्न
कर्कटक था| गृह गणना में ग्यारहवे घर में चार ग्रह उच्च स्थानों पर पाए गए| उनके
जन्मदिवस का उत्सव बारह दिनों तक चलता रहा और तेरहवे दिन उनका नामकरण गुरु वसिष्ठ ने श्रीराम नाम से किया| कौसल्या ने मेघ और काजल की छटा दिखाने वाले विष्णु को जन्म
दिया था|
गिरधर रामायण के अनुसार भगवान राम के जन्म के समय समय मंगलसूचक शब्द हो रहे थे| उनका जन्म बसंत ऋतु के चैत
मास की नवमी को मध्यान्ह में हुआ था| उस समय पुष्य नक्षत्र चल रहा था और वो रविवार
का दिन था| इसका वर्णन आनंद रामायण ने सारकाण्ड के द्वितीय सर्ग में कुछ इसतरह
किया है|
अथ विष्णु चैत्र मासि नवम्यां मध्यमे रचौ |
सूतिकागृह मध्येअथ कौसल्याया: पुरोअभवत ||
चतुर्भुज: पीतवामा मेघश्यामो महाद्युति: ||4||
मराठी का श्री राम विजय रामायण (अध्याय 4) राम भूअवतरण को अलग ढंग से चित्रित करता है |
वशिष्ठ की भविष्यवाणी
शंख चक्र शेष नारायण | चतुर्धा रूपे प्रकाटेल जगजीवन ||
ज्याची कथा ऐकतां पापी जन | उद्धारोनि तरतील || 49 ||
जन्म समय विवरण
बसंत ऋतु चैत्र मॉस | शुक्ल पक्ष नवमी दिवस ||
सूर्यवंशी जगन्निवास | सूर्यवासरी जन्माला || 54 ||
माध्यान्हा आला चंदाकिरण | पुष्य नक्षत्र साधून ||
अवतरला रघुनन्दन | पूर्ण ब्रह्म जगद्गुरु || 55 ||
रंगनाथ रामायण बालकाण्ड के 13वे अध्याय में पहली पंक्ति से राम जन्म का आख्यान शुरू हो जाता है| इसका
हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत है – “प्रशंसनीय मधुमास के श्रेष्ठ शुक्ल पक्ष में, पूर्ण
नवमी तिथि, बुधवार, पुनर्वसु नक्षत्र में मध्यान्ह के समय ग्रह पचाको के उच्च
स्थिति में रहते हुए, गुरु और चन्द्र का योग रहते हुए, ललित कर्क लग्न में, सर्वलिकाधार,
जगादेकवीर, इन्द्रादि देवताओं के स्तुत्य, दिव्य लक्षणों से देदीप्यमान, अव्यय,
असमान, आर्ट त्रान परायण, भव्य, चिदानंद, परम कल्याण मूर्ति, देवताओं के रक्षक,
दीनार्त्तिहरण, गुनू से अलंकृत, महान कीर्तिवान, शेषशायी, श्रीपति, हृषिकेश, कमल-गर्भ
के अर्द्धांश के रूप में, काकुत्स्थावंशी, श्रीराम कौसल्या के गर्भ से उत्पन्न
हुए|”
गिरधर रामायण के
अनुसार भगवान अट्ठारह वर्ष की सांवली मूरत के रूप में चतुर्भुज रूप धारकर प्रकट
हुए| शंख, चक्र, गदा और पदम् से युक्त होकर आभूषण, कुंडल, मुकुट भी शोभायमान हो
रहा था| उनके रूप पर करोडो कामदेव लज्जित हो जाते थे| पीताम्बर धारी, सुकोमल, रत्न
सी कान्ति लिए भगवान में अट्ठारह रेखा कृतियाँ विद्यमान थी| कौसल्या ने ये रूप
देखकर उनकी पूजा अर्चना की और राजा दशरथ के राजपुत्र के रूप में प्रकट होने की
प्रार्थना की| तब भगवान पालने में छोटे बच्चे के रूप में आकर रोदन करने लगे|
श्री चंद्रा झा कृत मैथिली रामायण के बालकाण्ड में तृतीय अध्याय में
हंसगति छंद में राम के
प्रादुर्भाव् का वर्णन मिलता है|
कौशल्या थिकि धनी जनिक सुत भेलाह |
ब्रह्मानंदानंदे दोष दुःख गेलाह || 59 ||
शुक्ल पक्ष नवमी शुभ कर्क्क उदित हित |
मध्य दिवस नक्षत्र पुनार्व्वसु अभिजित || 60 ||
पंचग्रह उच्चस्थ मेशामे दिनकर |
सृष्टि त्रिगुण उतपत्ति शक्ति
कर जनिकर || 61 ||
भगवान
के बाल रूप का वर्णन चौपाई छंद में किया गया है|
ई कहि बनला सुन्दर बाल |
इन्द्रनील छवि नयन विशाल || 82 ||
बाल अरुण तन दिव्य प्रकास |
जनिकर माया विश्व विलास || 83 ||
कंब
रामायण, विचित्र रामायण, जैन रामायण में भगवान के जन्म के समय की रूप सज्जा का
वर्णन नही मिलता है|
प्रामाणिक मान्य संदर्भ
इस आलेख
का उपसंहार तुलसीदास जी की रामचरित मानस के बाल काण्ड की चौपाइयो और दोहों
से कर रहा हूँ, जो राम जन्म के समय को बताती है और उनके रूप का भी वर्णन करती है| इनमें
कौसल्या द्वारा की गई राम जी की आरती “भए प्रगट कृपाला” को हटा दिया गया
है| इसमें भी भगवान चतुर्भुज रूप में प्रगट होते है और कौसल्या जी के अनुरोध पर बाल
रूप में दिखते है|
जोग लगन ग्रह बार तिथि सकल भए अनुकूल |
चार अरु आचार हर्षजुत राम जनम सुखमूल ||190||
नौमी तिथि मधु मास पुनीता |
सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता ||
मध्य दिवस अति सीट न घामा |
पावन काल लोक बिश्रामा ||
....
सुर समूह बिनती करि पहुंचे निज निज धाम |
जगनिवास प्रभु प्रगटे अखिल लोक बिश्राम || 191 ||
समापन
में वाल्मीकी रामायण के अंश नही उद्धृत करने पर इस आलेख को पूर्ण नही माना जा सकता
है| बालकाण्ड के 18वे सर्ग में इसका वर्णन है|
ततो यज्ञे समाप्ते तु ऋतुनां षट समत्ययु: |
ततश्च द्वादशे मासे चैत्रे नावमिके तिथौ |8|
नक्षत्रेअदितिदेवात्ये स्वोच्चसंस्थेषु पंचसु |
ग्रहेषु कर्कटे लग्ने वाक्पताविन्दुना सा |9|
प्रोद्यमाने जगन्नाथंसर्वलोकनमस्कृतम |
कौसल्याजन्यदरामं दिव्यलक्षणसंयुतम |10|
निष्कर्ष
भगवान
श्री राम का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को मध्यान्ह में हुआ था| उस समय
पांच ग्रह सूर्य, मंगल, शनि, गुरु और शुक्र उच्च स्थान में विराजमान थे| सूर्य मेष
राशि में था और लग्न में चन्द्रमा के साथ वृहस्पति उपस्थित थे| आधुनिक गणना के
अनुसार यह संयोग 5114 ईसा पूर्व में संभव है, जो भगवान राम के जन्म का वर्ष माना
जा सकता है|
आज राम नवमी है और भगवान राम आ गए है | जय श्री राम|
धन्यवाद|
डॉ हिमांशु शेखर





