गुरुवार, 25 अप्रैल 2024

वनवासा रिसार्ट

लेखिका: डॉ पूजा भारद्वाज


दोस्तों  तो हम और हमारी धन्नो  (टोयोटा इनोवा क्रिस्टा)  निकल चुके है ,एक नई मंजिल की ओर जहां मिलेंगी  कुछ मन लुभाने वाली यादें और नए चेहरे मुस्कान लिए हुए 

अरे अरे ये बताना तो भूल ही  गई कि हम जा कहां रहे हैं, हम जा रहे हैं देवभूमि उत्तराखण्ड के ऋषि कन्न्व की नगरी कोटद्वार के पास  "वनवासा " जो एक बहुत खूब सूरत रिजॉर्ट जो स्थित है  कोटद्वार से कुछ किलोमीटर दूर काला गढ़ टाइगर रिजर्व में, तो देरी किस बात की शुरुवात करते है अपने सफर की...

28/3/2024 को हम  सुबह ६ बजे  बजे निकल पड़े , मेरठ होते हुए  करीब 8:30 से हम चीतल ग्रैंड होटल पहुंच गए,पर किसी को भूख नही लग रही थी,तो हमने सिर्फ प्रसाधन इस्तेमाल किया और आगे निकल गए , खतौली चीनी मिल हमारे रास्ते में पड़ी और जगह जगह पर गुड बनाने वाले कोल्हू चल रहे थे , हम 90s के गीत सुनते और गुनगुनाते हुए जा रहे थे ,अब करीब 10:00 बजे  बिजनौर से आगे भूख लगने लगी उसके बाद हमें अच्छा ढाबा या कोई  रेस्ट ओ रेंट नहीं मिला , खाना खाना करते हुए हम पहुंचे कीरतपुर वहां मिला हमको एक पंजाबी ढाबा और बस आलू प्याज के स्वादिष्ट परांठा और छाछ मीठी लस्सी अब पेट भरा और जान में जान आई।

11:30 बजे हम कणव नगरी कोटद्वार पहुंच गए ,कोटद्वार में हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर भी है , सिद्धबली मंदिर जिसकी मान्यता है की यहां जो कोई अपना बोला हुआ प्रसाद भूल जाता है तो यहां आ कर प्रसाद बांटने से सब काम सिद्ध हो जाते है ,जय बजरंग बली


कोटद्वार से शुरू होती है पहाड़ों की चढ़ाई , क्योंकि वहां से 70 किलोमीटर दूर था   वनवासा रिजॉर्ट और यहां पहुंचने का रास्ते काला गढ़ टाइगर रिजर्व से हो कर गुजरता है,आगे चले तो कुछ छोटे छोटे गांव मिले और फिर शुरू होता है "कालागढ़ टाइगर रिजर्व " जिस के बीच में से होते हुए अपनी मंजिल तक पहुंचना था,रास्ते में जंगल के बीच हमने यादें संजोने के लिए कुछ तस्वीरें ली।


और करीब 2:20 पर हम रिजॉर्ट  पहुंचने वाले ही थे कि देखा  वहां भू स्खलन होने की वजह से एक विशाल पत्थर सड़क के बीच में पड़ा है और उसको हटाने के लिए विस्फोट की तयारी हो रखी है , वहा एक आदमी खड़ा था  वो पास आया और बोला की आप अपनी गाड़ी पीछे ले जाओ ,यहां ब्लास्ट किया जा रहा है ,पहले तो लगा आना बेकार हो गया पर उसने कहा ब्लास्ट के बाद आप जा सकते हो ,अब गाड़ी यू टर्न तो हो नहीं सकता था तो सब ने गाड़ी रिवर्स लेली ,और कुछ ही सेकंड में इतनी जोरदार धमाका हुआ की सब डर गए , फिर रास्ता साफ हुआ और हम सभी  पहुंच गए अंततः अपने वनवासा रिजॉर्ट 😀 आ कर स्वागत पेय से स्वागत हुआ और कमरे दिए गए सामान रखा और लंच का समय हो चुका था ,लंच किया और आराम किया क्योंकि 7 घंटे गाड़ी में थकान तो होती है, बच्चे स्विमिंग पूल में चले गए ,7 बजे से मैजिक शो देखा,फिर लाइव म्यूजिक एंड डिनर ,डिनर के बाद सब ने मिलकर कुछ खेल खेले और एक दिन इस तरह एक समाप्त हुआ। वनवासा रिजॉर्ट  का रोजाना का एक रात्रि का चार्ज ७ से ८ हजार रुपए है जो के एक कपल के लिए है, जिसमें,ब्रेक फास्ट डिनर,लंच तीनों मिलते है जब कभी सुकून और शांति की तलाश हो तो एक बार जरूर आए अपने दोस्त और परिवार के साथ 

दूसरे दिन  हम सब लंच के लिए करीब 9: 45 पर पहुंचे ,लंच किया वहा कई और लोग आए हुए थे ,तो जैसा मेरा व्यवहार है मैं उन लोगों से बात करने चली गई ,जहां मेरी मुलाकात एक पहाड़ी परिवार से हुई , वैसे तो वह लोग दिल्ली में रहते है , मेरी बात हुई कुसुम नेगी जी से बात हुई ,उन्होंने बातों बातों में बताया हम यहां अपने गांव जागर करने आए थे ,जागर के बाद हमने सोचा थोड़ा आराम कर लिया जाए तो रिजोर्ट आ गए ,

मैंने कहा :जागर ये क्या होता है पहली बार नाम सुना ,

कुसुम जी ने बताया कि जागर मतलब जागरण हमारे यहां  पूरे कुनबे के साथ मिलकर ये पूजा की जाती है ,कोई कहीं भी रह रहा हो पर उसे जागर के लिए आना पड़ता है

इसमें ग्राम देवताओं की पूजा की जाती है ,जिसमें हम अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए और कुछ गलती हुई हो उसके लिए माफी मांगते है और पूजा करते है,मुझे वैसे भी ऐसी बातें जानने का शौक है मैं उनकी बातें बड़ी गौर से सुन रही थी ,

कुसुम जी ने मुझे एक बात और बताई की एक परिवार पूरी तरह संपन्न था ,अचानक उनके घर बीमारी बढ़ने लगी ,तो वह अपने गांव आए और खोज ने लगे की हम से क्या गलती हुई है या क्या भूल रहे है हम जिस की वजह से ये सब हो रहा है कई महीने बीत गए,एक दिन अचानक एक १० साल की लड़की सामने आई और बोली की तुम इतने साल मुझे ही ढूंढ रहे हो ,मैं तुम्हारी दादी हूं , मैं भी सरप्राइज़ थी ये क्या है, क्योंकि आज कलयुग में कोई इन बातों को नहीं मानता पर फिर भी अपनी मान्यता है ,मैंने पूंछा फिर क्या हुआ कुसुम जी हंस गई ,मैंने कहा प्लीज़ बताओ मैं कल चली जाऊंगी ,फिर कहा आप से मुलाकात होगी ,तो उन्होंने बताया की वह लड़की इतना बोलते ही भाग गई उन्होंने उसका पीछा किया ,तो लड़की बदली बदली नज़र आई ,जब जाने लगे तो फिर बोली की तुम्हारे दादा जी ने दूसरी औरत  की वजह से  मुझे घर से निकल दिया था और मेरा हक तुम लोग निभा रहे हो अब तुम सब  अपने पूरे खानदान को लेकर आओ जागर करो तब शांत सब ठीक होगा फिर उन्होंने अपने सात पीढ़ी के लोगों को जागर के लिए सूचना दी सब गांव में एकत्र हुए और पूजा अर्चना की।

बस मस्ती ,बहुत सारी फोटो क्लिक की,वहां रिजॉर्ट से थोडी सी दूरी पर एक दुकान थी मैं वहां चली गई  और उनसे बात की पहाड़ों पर रहन सहन की ओर दिन में  स्विमिंग पूल का ओर शाम  को लाइव म्यूजिक और डीजे  पर नृत्य का आनंद लिया और खूब नृत्य किया।अगले दिन ब्रेकफास्ट कर के निकल ही रहे थे की बहुत तेज तूफ़ान और खूब तेज बारिश हो गई और थोड़ी ठंड बढ़ गई थी ,जिसे कहते है गर्मी में ठंड का एहसास 😂 फिर हम निकले घर के लिए और कुछ 30 किलोमीटर जा कर हमें रास्ते में बंदरों का झुंड दिखा और दिखा बारहसिंगा  क्योंकि वो रास्ता जंगल का होता है कालागढ़ टाइगर रिजर्व का मगर टाइगर नही दिखा। और हम एक सुखद अनुभव लेकर अपने घर आ गए , क्योंकि जितना सुकून और शांति अपने घर में है कही  नही।

ये थी मेरे सफ़र की कुछ यादें जो हमेशा मेरे साथ रहेंगी ,आप भी पढ़े और कैसा लगा जरूर बताएं।

धन्यवाद।

डॉ पूजा भारद्वाज

9 टिप्‍पणियां:

  1. Rekha Chauhan
    वाह पूजा जी बहुत सुंदर संस्मरण खूबसूरत यादों के साथ

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  2. Rekha Chauhan
    जागरण अनोखा शब्द मिला

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  3. बहुत ही सुन्दर विवरण 👌👌👌👌

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  4. बहुत ख़ूबसूरत जगह होगी ऐसा लेख पढ़कर मुझे लगा,लिखा भी बहुत अच्छा है(सरोजिनी)

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  5. बहुत सुंदर संस्मरण लिखा है आप ने। यात्रा का विवरण ऐसे दिया कि लगा हम भी साथ में चल रहे हैं। देव भूमि की दादी वाली घटना इस संस्मरण की याद है जो पूरी यात्रा का सार बन कर रहेगी। सरल भाषा में सुंदर लेख के लिए बहुत बहुत बधाई!!

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  6. बहुत अच्छा, ऐसा लगा कि आपके साथ रिजॉर्ट देख लिया। बधाई लेख और आनन्ददायक अनुभव के लिए।

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